उत्तर प्रदेश

फंदे में फंसा टोडरपुर का ‘रिश्वतखोर’ मुन्ना प्रधान, डीएम ने दिए जांच के आदेश

Munna Pradhan, the 'bribekhor' of Todarpur trapped in a trap, ordered the inquiry, Ghazipur in Up

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  • वीडीओ शिवांकित वर्मा बाराचवर करेंगे मामले की जांच
  • मुन्ना प्रधान के खिलाफ हाईकोर्ट में भी लंबित है मामला
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रजनीश मिश्र, बाराचवर (गाजीपुर)
उत्तर पदेश के जनपद गाजीपुर के विकासखंड बाराचवर के ग्राम पंचायत टोडरपुर के ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर द्वारा रिश्वत लेने के मामले जिलाधिकारी गाजीपुर ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले की जांच खंडविकास अिधकारी शिवांकित वर्मा करेंगे।
उल्लेखनीय है कि गत सप्ताह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के लिए आई ग्रांट से मुन्ना प्रधान द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत लिए जाने की वीडियो वायरल हुई थी। इस वीडियो में प्रधान अस्पष्ट रूप से कह रहा है कि इसमें सेक्रेटरी को देना होता है। तब जा कर घर बनाने के लिए फंड की रकम मिलती है।


इस संबंध में फोन पर खंडविकास अधिकारी ने बताया कि ग्राम सभा टोडरपुर के प्रधान द्वारा रिश्वत लेने का मामला मीडिया के द्वारा उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने जांच के अदेशों की पुष्टि करते हुए कहा कि वह खुद ग्राम सभा टोडरपुर जाएंगे। प्रधारमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत अभियान के तहत आवसीय शौचालयों की जांच करने के साथ ही वायरल वीडियो की सत्यता भी जांचेंगे। ‘द झरोखा डॉटकॉम’ बातचीत में उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

टोडरपुर में 101 कन्याओं की सामुहिक दी करवाकर चर्चा में आया था आरोपी मुन्ना

उल्लेखनीय है कि करीब तीन साल पहले अपने गांव सभा टोडरपुर में 101 कन्याओं की शादी करवा कर मुन्ना प्रधान चर्चा में आया था। उस समय उसके इस नेक काम में गांव के लोगों ने भी सहयोग किया था। इसकी चर्चा जब टोडरपुर से निकल कर जिले तक पहुंची तो यह समाज कल्याण विभाग मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना ‘ब्रांड एंबेस्डर’ बन गया। इसके बाद इस योजना के तहत बाराचवर ब्लाक सहित जिले के अन्य ब्लाकों में भी करीब 1001 कन्याओं की शादी करवा कर समाजसेवी के रूप में उभर कर सामने आया। लेकिन इसके पीछे छुपी इसकी मंसा मात्र एक वीडियो ने उजागर कर दिया।

रंजीत मिश्रा ने सबसे पहले मुन्ना पर लगाया था भ्रष्टाचार का आरोप

रंजीत मिश्रा

गांव के विकास के लिए आए फंड में गबन आरोप सबसे पहले गांव टोडरपुर के रंजीत मिश्रा ने लगाया था। इसके लिए उन्होंने आरटीआई के तहत गांव में हुए विकास कार्यों और इसपर खर्च धन की जानकारी मांगी थी। यह आरटीआई उन्होंने मई 2020 मे लगाई थी। आरटीआई के जवाब में उन्हें विकास खंडबाराचवर से एक वेवसाइट का लिंक जारी कर वहां से जानकारी हासिल करने को कहा गया था।

गांव में 475 शौचालयों के लिए उतार गया था 58 लाख फंड

रंजीत मिश्रा ने द झरोखा डॉटकॉम को बताया कि जब उन्होंने वेबसाइट से जानकारी प्राप्त की उन्हें पता चला कि गांव में 475 शौचालयों के निर्माण के लिए मुन्ना प्रधान ने कुल 58 लाख रुपये उतारे हैं। रंजीत ने आरोप लगाया कि कागजों में तो 475 शौचालयों का निर्माण करवाया गया है, जबिक जमीनी स्तर पर 215 शौचालयकों का ही निर्माण हुआ है। वह भी आधाअधुरा। यानी किसी शौचालय में सीट नहीं है तो किसी का टैंक नहीं और किसी में छत नहीं है। मिश्रा ने कहा कि यदि ढंग से जांच हो तो सच्चाई सामने होगी।

अधिकारियों ने दबा दिए थे हाई कोर्ट के आदेश

रंजीत मिश्रा ने आरोप लगा कि जिला स्तर से लेकर ब्लाक स्तर तक अधिकारियों ने हाई कोर्ट से मिले जांच के आदेशों को भी दबा दिया था। उन्होंनेबताया कि उनके गांव में करीब दो हजार से अधिक मतदाता हैं। उन्होंने मुन्ना प्रधान द्वारा की जा रही अनीयमीतताओं के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। माननीय न्याधीश ने 31 जुलाई 2020 को तत्कालीन डीएम ओम प्रकाश आर्या को दो माह में जांच पूरी कर बंद लिफाफे में देने के आदेश दिए थे।

देवेंद्र मिश्रा को बनाया गया था जांच अधिकारी

रंजीत मिश्रा ने बताया कि उस समय तत्कालीन डीएम गाजीपुर ने लघुसिंचाई अधिकारी देवेंद्र मिश्रा को जांच अधिकारी बनया था। लेकिन अधिकारियों ने पधान न्ना राजभर के कार्यों की जांच करने की बजाय फाइल को ही दबा दिया। इसके बाद उन्होंने दोबारा हाईकोर्ट में कंटेम के लिए अपील की। इसके बाद तीसरी बार पांच नवंबर को हाईकोर्ट ने 15 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे, लेकिन इस आदेश को भी दबा दिया है। उन्होंने बताया कि यह मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है।

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फंस सकते हैं सेक्रेटरी

वायरल वीडियो में जिस तरह से ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर जरूरतमंदों को आवास योजना का लाभ देने के लिए 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए सेक्रेटरी से लेकर ब्लाक के अन्य धिकारियों की हिस्सेदारी की बात कह रहा है उसे संदेह की सूई ग्रामसभा टोडरपुर के सेक्रेटरी मुकेश सिंह और अन्य अधिकारियों की तरफ भी घूम रही है। रिश्वत प्रकरण की आंच इन अधिकारियों पर भी आ सकती है, क्योंकि फंड सेक्रेटरी के माध्यम से प्रधान तक पहुंचता है।

लोगों ने की वीजिलेंस से जांच की मांग

मुन्ना प्रधान के कार्यों से असंतुष्ट लोगों ने मुन्ना की वीजिलेंस से जांच की मांग की। गांव के लोगों का कहना है कि इस प्रधान ने अपने पांच साल के कार्यकाला में गांव का कोई विकास नहीं करवाया है। इसके आय की भी जांच होनी चाहिए। कुछ लोगों ने तो समाज कल्याण विभाग मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कन्याओं दी जाने वाली सरकारी राशि में भी हेर-फेर का आरोप लगाते हुए इसकी भी जांच किए जाने की मांग की है।

प्रधान ने नहीं उठाया फोन

मुन्ना प्रधान पर लग रहे इन तमाम आरोपों में उनका पक्ष जानने के लिए उन्हें उनके मोबाइल पर कई बार फोन कर संपर्क अस्थापित करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने ना तो कोई फोन उठाया और ना ही कोई मैसेज किया।

सेक्रेटरी ने झाड़ा पल्ला

वीडियो वायरल होने के संबंध में जब सेक्रेटरी मुकेश सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामे से उनका कोई लेनादेना नहीं है। मामले की जांच होने दिएजीए । इसके अलावा मै कुछ नहीं कहना चाहता। वहीं खंड विकास अधिकारी का कहना है कि मामले की पूरी बारीकी से जांच की जाएगी। जोभी दोषी होगा उसे दंडित किया जाएगा।

सम्बंधित खबर : 101 कन्याओं का विवाह कराने वाले मुन्ना प्रधान का घुस मांगते हुए विडियो हुआ वायरल

यह भी पढ़े : अगर आप के गांव का प्रधान सरकारी फंड में कर रहा है घपला तो इस तरह करें शिकायत

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