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अमृतसर। अमृतसर की मिट्टी में इतिहास सिर्फ दफ्न नहीं है, वह सांस भी लेता है। सरहद की गूंज, तोपों की धमक और शाही जुलूसों की आहट! यह शहर हर दौर की कहानी अपने सीने में संजोए बैठा है। इसी धरती से कुछ कोस दूर बसा अटारी गांव आज भले ही अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में पहचाना जाता हो, लेकिन कभी यहां ऐसी शाही शहनाइयां बजी थीं जिनकी गूंज पंजाब ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान में सुनाई दी थी। यह कहानी है कुंवर नौनिहाल सिंह और नानकी की शाही शादी की। उस युवराज की, जिसमें लोग महाराजा रणजीत सिंह की छवि देखते थे। कहा जाता है कि अटारी के एक तालाब के किनारे सजा वह विवाह समारोह वैभव, प्रतिष्ठा और शक्ति का ऐसा प्रदर्शन था, जैसा न पहले कभी देखा गया, न बाद में दोहराया गया।
करीब 200 साल बाद भी अटारी की हवा में उस शाही बारात की परछाइयां तैरती महसूस होती हैं, मानो इतिहास आज भी अपने धूल-धूसरित पन्नों से झांक कर उस गौरवगाथा को फिर से सुनाना चाहता हो। आप शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के पोते कुंवर नौ निहाल सिंह और जरनैल शाम सिंह अटारी की बेटी नानकी की वह दास्तान पढ़ रहे हैं, जो सिख साम्राज्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया।
अफगानों की ताकत को तलवार की धार पर तौलने वाले शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के कुशल सेनानायकों की बात करें तो इनमें शाम सिंह अटारी का नाम बड़े अदब के साथ लिया जाता है। शाम सिंह न केवल महाराजा रणजीत सिंह की सेना के सेनानायक थे, बल्कि वह उनके रिश्तेदार भी थे। और यह रिश्तेदारी शुरू हुई थी शाम सिंह की बेटी नानकी और राजकुमार नौ निहाल सिंह की शादी से। कुंवर नौ निहाल सिंह महाराजा खड़क सिंह के इकलौते पुत्र थे, जिन्हे प्रेम से कुंवार भंवर सा भी कहा जाता है।
वैसे तो अटारी गांव का इतिहास कौर सिंह और गौर सिंह से होता है जो जरनैल शाम सिंह अटारी के दादा थे लेकिन, अटारी के इतिहास में वह सुनहरा अध्याय तब जुड़ा जब शाम सिंह और महाराजा रणजीत सिंह का संबंध रिश्तेदारी में बदला। जरनैल शाम सिंह ने अपनी बेटी नानकी का विवाह महाराजा के पोते नौ निहाल सिंह से करने का प्रस्ताव भेजा। कहा जाता है कि इस विवाह की योजना नौ निहाल सिंह की दादी दातार कौर ने बनाई थी।
बारातियों की सुविधा के लिए खोदवाया तालाब
अटारी गांव में आगंतुकों का साक्षात्कार जिस तालाब से होता है उका इतिहास करीब 190 साल पुराना है। कहा जाता है कि यह तालाब शाम सिंह अटारी ने अपनी बेटी नानकी के विवाह के समय बारातियों की सुविधा के लिए खोदवाया था। कर्नल हरिंद सिंह जो कि खुद शाम सिंह अटारी के वंशज हैं, कहते हैं की इसी तालाब के आसपास कुंवर नौ निहाल सिंह की बारात ठहरी थी। कर्नल हरिंदर सिंह के मुताबिक यह शाही शादी उस समय देश-विदेश के राजा-महाराजाओं में चर्चा कर विषय बनी थी। बारातियों के ठहरने के लिए कई कोस में शामियाने और तंबू लगाए गए थे। कर्नल हरिंदर सिंह के मुताबिक इसका उल्लेख सोहन सिंह सूरी की पुस्तक उमदत-उत-त्वारीख में भी किया गया है।
तीन तरह की व्यवस्था थी तालाब में
प्रो. दरबारी लाल कहते हैं कि आज जिस स्वरूप में अटारी गांव का तालाब दिखता है, वह उससे भी कहीं ज्यादा भव्य था। तब इस तालाब के आसपास कोई आबादी नहीं थी। यह आबादी देश विभाजन के बाद बसी है। अगर तालाब की बात करें तो इसकी गहराई करीब 50 के आसपास होगी। इस तालाब में तीन तरह की व्यवस्था थी, क्योंकि उस जमाने में जलस्रो का साधन कुंआ और तालाब ही हुआ करते थे। इस तालाब में तीन तरह की व्यवस्था की गई थी। एक तो बारात में आए पुरुषों के लिए खुली घाट की व्यवस्था थी, दूसरी व्यवस्था बंद घाट की जो खासतौर से महिलाओं के लिए बनाई गई थी और तीसरी व्यवस्था पशुओं के लिए की गई थी जो सीधे तालाब में जा कर पानी पी सकें। इस तालाब की भव्यता को आज भी देखा जा सकता है।
विवाह की भव्यता ऐसी की सरहेनरी भी हुआ कायल..
सोहन सिंह सूरी की पुस्तक उमदत-उत-त्वारीख के मुताबिक नौ निहाल सिंह का विवाह अप्रैल 1837 यानी आज से करीब 189 साल पहले हुआ था। सोहन लाल सूरी कहते हैं कि महाराजा का पोते प्रति प्रेम कोई और नहीं हो सकता कि उन्होंने नौ निहाल सिंह का विवाह इतने भव्य तरीके से किया कि भारतीय राजाओं को तो छोड़िए विदेशी मेहमान भी मेहमान नवाजी के कायल हो गए। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसास इस विविह में माराजा रणजीत सिंह ने करीब 5,00,000 मेहमानों को आमंत्रित किया था। और एक ही दिन में करीब 20,00,000 रुपये दान कर दी थी। प्रो: दरबारी लाल कहते हैं कि उमद-उत-त्वारीख के अनुसार ब्रिटिश गवर्नर जनरल, कमांडर-इन-चीफ सर हेनरी फेन, उनके पुराने मित्र सर चार्ल्स मेटकैफ (जो उस समय आगरा के गवर्नर थे) और कई भारतीय रियासतों के शासकों को निमंत्रण भेजा गया था। इनमें पटियाला, फरीदकोट, कपूरथला, नारायणगढ़, नाभा, जिंद, मलेरकोटिया, कालसिया, मंडी और सुकेत के शासकों ने निमंत्रण का जवाब दिया। गवर्नर जनरल की ओर से कमांडर-इन-चीफ सर हेनरी फेन, उनकी पत्नी और अन्य कर्मचारियों ने समारोह में भाग लिया।
दरबार साहिब में हुई सेहराबंदी, अटारी पहुंची बारात
सोहन लाल सूरी जो महाराजा रणजीत सिंह के दरबार में रोजनामचा लिखते थे, ने अपनी पुस्तक ‘ बातां शेर-ए-पंजाब दियां’ में नानकी और नौ निहाल सिंह की शादी का उल्लेख करते हुए लिखते हैं- महाराजा रणजीत सिंह अपने महल लााहौर से चलकर पोते नौ निहाल सिंह की सेहराबंदी के लिए अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब पहुंचे और यहीं पर उन्होंने नौ निहाल सिंह की सेहराबंदी की रस्म निभाई। सेहराबंदी के बाद कुंवर सा की बारात अटारी पहुंची और गांव के बाहर बने तालाब के आसपास ठहरी।
कुछ इस तरह अटारी पहुंची बारात
शाम सिंह अटारी के वंशज लााल जी सिद्धू के शाम को दूल्हे को भेंट चढ़ाने की रस्म हुई। लाल जी कहते हैं कि ब्रिटिश गवर्नर जनरल, कमांडर-इन-चीफ सर हेनरी ने ग्यारह हजार रुपये, ध्यान सिंह ने एक लाख पच्चीस हजार और गुलाब सिंह, सुचेत सिंह और रूप लाल मिश्र ने 51-51 हजार रुपये भेंट किए। इसके बाद अन्य मेहमानों ने भी भेंटें दी। लाल जी कहते हैं कि उस समय कुल भेंटों का मूल्य पचास लाख रुपये था। वे कहते हैं पुस्तक ‘उमदत-उत-त्वारीख’ के अनुसार श्री हरिमंदिर साहिब में दूल्हे आशीर्वाद लिया इसके बाद बारात अटारी के लिए रवाना हुई। कहते हैं कि इस बारात की भव्यता को देखने के लिए देश के कोने-कोने से आए लाखों दर्शक अमृतर से अटारी तक जाने वाली सड़कें दोनों ओर खड़े हो कर बारात का उत्साह बढ़ा रहे थे। बारात में दुल्हा नौ निहाल सिंह को न्यौछावर कर सोने और चांदी की मोहरें लुटाई जा रही थीं।
तोपों से हुआ बारात का स्वागत
शाम सिंह के वंशज विरेंद्र सिंह कहते हैं कि मेजबान शाम सिंह ने बारात का स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विरेंद्र सिंह के अनुसार बारात जब अटारी पहुंची तो इंतजाम देख हर कोई हैरान था। पूरे रास्ते में मखमल के कारपेट बिछाए गए थे। तोपों से बारातियों का स्वागत हुआ। शाम सिंह ने महाराजा रणजीत सिंह का स्वागत 100 स्वर्ण मोहरें और पांच अरबी नस्त के घोड़े भेंट किए, जबकि समधी खरक सिंह का स्वागत 51 मोहर और एक घोड़े के साथ किया। इसी तरह अन्य राजकुमारों का स्वागत 11-11 मोहर और एक-एक घोड़े के साथ किया। इसी तरह ब्रिटिश गवर्नर जनर सर हेनरी ने महाराजा को एक हाथी, आठ घोड़े, दो बैरल वाली तोप और दो पिस्तौलें उपहार के रूप में भेंट किया। यदि दान-पुण्य की बात करें तो 8 किमी. के घेरे में एकत्र हुए जरूरतमंदों को पांच-पांच रुपये की थैलियां भेंट की गई। इस तरह कुल 20 लाख रुपये वितरित किए गए थे।
नानकी और नौ निहाल की शादी पर घोषित हुआ पुरस्कार
जीएनडीयू के इतिहास विभाग से सेवानिवृत्त डा. हरीश शर्मा कहते हैं कि नानकी और नौ निहाल सिंह के विवाह के सम्मान में, रणजीत सिंह ने एक सम्मान पुरस्कार की शुरुआत की, जिसे कौकबी-इकबाली-पंजाब, यानी पंजाब की समृद्धि का सितारा, के नाम से जाना जाता था। इस सम्मान के तीन स्तर थे, जिनमें से प्रत्येक का अपना पदक था। पदकों के एक तरफ रणजीत सिंह की तस्वीर और उन पर सोने और लाल रंग के रेशमी रिबन लगे होते थे। वे कहते हैं कि इसका उल्लेख सोहन लाल सूरी ने भी अपनी पुस्तक में किया है।