Home धर्म / इतिहास हर महिने पड़ती है शिवरात्रि लेकिन फाल्गुन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि क्यों होती है महाशिवरात्रि

हर महिने पड़ती है शिवरात्रि लेकिन फाल्गुन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि क्यों होती है महाशिवरात्रि

by Jharokha
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रजनीश कुमार मिश्र गाजीपुर । पंचांग के अनुसार साल के हर महिने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी में शिवरात्रि पर्व पड़ता है । लेकिन जितना महत्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी को पड़ने वाले शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहां जाता है । फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी को जो महाशिवरात्रि पड़ती है उसका बड़ा ही महत्व है । वेदों के अनुसार जो हर महिने चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है उसका महत्व भगवान भोलेनाथ के दार्शनिक व आध्यात्मिक अर्थों से जुड़ जाता है । इसी कारण हर महिने शिवरात्रि पड़ती है ।

महाशिवरात्रि का महत्व

हम यहां बात कर रहे थे हर महिने पड़ने वाली शिवरात्रि की अब बात करते हैं फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को पड़ने वाली महाशिवरात्रि की पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि को विशेष माना गया है । क्यों की चतुर्दशी का अर्थ होता चंद्र आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार मनुष्य में चौदह प्रकार मनोविकार व आंतरिक तत्व माने गये है । जिनमें से पांच कर्मेंद्रियां पांच ज्ञानेंद्रियां व मन-बुद्धि चित व अहंकार शामिल हैं ।

चंद्रमा व शिव का गहरा संबंध

भगवान भोलेनाथ का तो अनेकों नामकरण है । उसी में एक चंद्रशेखर भी है । भगवान भोलेनाथ अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण करते हैं । चंद्रमा शांति व वैराग्य का प्रतीक भी माना जाता है । चतुर्दशी की रात चंद्रमा क्षीण अवस्था में होता है । इस लिए चतुर्दशी तिथि पर नियंत्रण और साधना के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है । इसी लिए मासिक शिवरात्रि कहा जाता है । जिसका मतलब होता है । रात को शिव तत्व में प्रवेश कर रहे हैं

शिवलिंग प्रगट होने की कहानी

पुराणों के अनुसार ब्रह्म व विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो रहा था । जिसे समाप्त करने के लिए कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान भोलेनाथ ने शिवलिंग के रूप में प्रगट हुए इसलिए ये कृष्ण पक्ष की तिथि शिव के ज्योती रुप से मानी गई । भागवत पुराण के अनुसार समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष को शिव ने इसी रात्रि ग्रहण किया था. विषपान के बाद देवताओं ने पूरी रात उनका जागरण और स्तुति की. इसी से ‘शिवरात्रि जागरण’ की परंपरा जुड़ी मानी जाती है.

‘रात्रि’ केवल अंधकार नहीं, बल्कि अंतर्मुखी होने का समय है. दिन बाहरी गतिविधियों का प्रतीक है, जबकि रात ध्यान और आत्ममंथन की. शिव को योगी, ध्यानमग्न और समाधिस्थ देव माना जाता है. इसलिए उनकी उपासना रात्रि में विशेष फलदायी मानी जाती है. हर मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला व्रत ‘मासिक शिवरात्रि’ कहलाता है.।

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