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लखनऊ/ सरड़ा (बलिया) : बहुजन समाज पार्टी (BSP) के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से एक मात्र विधायक उमाशंकर सिंह के घर आयरर विभाग का छापा पड़ा है। यह छापा उनके लखनऊ (Lucknow) के गोमती नगर स्थित आवास पर 25 फरवरी बुधवार को तड़के पड़ा है। बताया जा रहा है एक साथ 50 से अधिक आयकर विभाग के अधिकारी पुलिस टीम के साथ उनके आवास और कार्याल पर छापेमारी की। बता दें कि विधायक उमाशंकर सिंह पिछले कुछ सालों से कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे हैं। अब तक उनका दो बार आपरेशन हो चुका है और वह अपने लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास पर आइसोलेशन में रह रह रहे हैं।
पेमारी की इस कार्रवाई में आयकर अधिकारियों ने उमाशंकर के आवास पर डाक्टर और नर्सों के आनेजाने पर रोक लगा दिया है। मीडिया को भी इससे दूर रख गया है। वहीं भाजपा सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने आयकर विभाग की कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जताई है। उमाशंकर सिंह पुर्वांचल के कद्दावर नेताओं में से एक माने जाते हैं और यह मायावती के बेहद करीबियों में भी एक हैं। उमाशंकर सिंह की लोकप्रियता का आंदाजा इसी बाात से लगाया जा सकता है कि वह मोदी लहर में भी अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे और मौजूदा समय में बसपा के पूरे प्रदेश में एक मात्र विधायक हैं।
कौन है उमाशंकर सिंह
उमाशंकर सिंह पेशे से ठेकेदार और बलिया जिले के रसड़ा विधानसभा सीट से एक मात्र बसपा के विधायक हैं। संपत्ति के मामले में भी उमाशंकर सिंह का नाम प्रदेश के टाप विधायकों में शामिल है। उमाशंकर सिंह रसड़ा विधानसभा सीट से वर्ष 2012, 2017 और 2022 में जीत दर्ज कर चुके हैं। उमाशंकर सिंह पहली बार बसपा के टिकट पर 2012 में रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये थे। 2017 में भी बसपा ने उन्हें टिकट दिया और इस बार भाजपा की लहर होने के बाद भी जीतने में कामयाब रहे थे। उमाशंकर सिंह 2012 में जब वे विधायक चुने गये तब उनके खिलाफ एडवोकेट सुभाष चंद्र सिंह ने 18 दिसंबर, 2013 को शपथ पत्र देकर लोकायुक्त संगठन में शिकायत की, कि वे विधायक होने के बाद भी लोक निर्माण विभाग से सरकारी ठेके लेकर सड़क निर्माण का कार्य कर रहे हैं। शिकायत के बाद इस मामले की जांच तत्कालीन लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने की। जांच में उमा शंकर दोषी पाए गये थे। राज्यपाल ने उमाशंकर सिंह के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाते हुये 29 जनवरी, 2015 को उन्हें विधान सभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ उमाशंकर हाईकोर्ट गए। इसके बाद 14 जनवरी 2017 को उनकी विधायकी खत्म कर दी गई थी। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में उमाशंकर फिर से बसपा के विधायक चुन लिए गए। उमाशंकर ने हिंदू-मुस्लिम युवक-यवतियों की 300 से अधिक शादियां करवाकर चचर्चा में आए थे। मानाजााता है कि उमाशंकर सिंह की पैठ सभी वर्गों के लोगों के लोगों में है।
योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जताई नाराजगी
आयकर विभाग की इस कार्रवाई पर योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्होंने एक्स पर लखा है- उमाशंकर सिंह विधायक रसड़ा जनपद बलिया जिनके घर में मेरी बेटी व्याही है के घर में आज आयकर विभाग के द्वारा रेड की जा रही है। देश प्रदेश के राजनेता आयकर सहित सभी संस्थाओं को पता है कि उमाशंकर सिंह दो वर्ष से अधिक से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे है, वर्तमान परिस्थितियों में उमाशंकर सिंह जी के लिए धनार्जन नहीं सांसे बचाने में ही सारा समय और धन व्यय हो रहा हैं सभी व्यवसाय लगभग बंद हो गए हैं।
आज अपने आवास में आइसोलेशन में रह रहे हैं। विधानसभा का सत्र एक विधायक के लिए महत्वपूर्ण होता है लेकिन एक घंटे के लिए भी नहीं जा सके। इस समय उनके घर पर नर्स या डाक्टर को भी जाने की अनुमति नहीं है यदि उनके जीवन को कोई हानि होती हैं तो ये संवेदनहीन संस्थायें जिम्मेदार होंगी। इस प्रकार की परिस्थितियों में दुर्लभतम अपराधों में भी माननीय न्यायालय दया के आधार पर याचिका स्वीकार कर दोष मुक्त कर देते है। किंतु इस कठिन दौर में भी कौन संवेदनहीन राजनेता या संस्था हो सकती हैं जो ऐसी परिस्थितियों में भी पीड़ा देने की सोच सकता है, प्रभु ऐसे लोगों को और संस्थाओं को सदबुद्धि दें।
