- सावन में शिवभक्ति का उत्साह, पूजा सामग्री से लेकर पर्यटन तक व्यापार को मिला बूस्ट
- श्रद्धालुओं की भीड़ से बाजार गुलजार, धार्मिक अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार
अमृतसर । सावन का पवित्र महीना केवल भगवान शिव की आराधना और धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए भी संजीवनी साबित होता है। मंदिरों में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के साथ फूल, बेलपत्र, दूध, पूजा सामग्री, मिठाई, फल, वस्त्र और कांवड़ से जुड़े सामान की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। होटल, परिवहन और छोटे कारोबारियों की आय भी इस दौरान बढ़ जाती है। धार्मिक आस्था और व्यापार का यह अनूठा संगम सावन को केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बना देता है। व्यापार मंडल की माने तो सावन एक से डेढ़ हजार करोड़ से अधिक का कारोबार विभिन्न माध्यमों से होता है। चाहे वह पूजा-पाठ, लंगर-भंडारे से संबंधित वस्तु, धार्मिक पुस्तकें या होटल-ट्रैवल का कारोबार। हर तरफ काम को गति मिली रहती है।
शिव और पार्वती को समर्पित सावन में शहर की गलियों से लेकर मंदिरों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले की धूम है। सावन के रिमझीम फुहारों के बीच हर हर महादेव का जयघोष व्यापार को नई उर्जा देने वाला साबित हो रहा है। कारोबारियों की माने तो सावन से कारोबार का उठान होता है जो दीपावली और छठ तक जारी रहता है। सावन में व्रत में खाई जाने वाली वस्तुओं, कपड़ा, चूड़ी-बिंदी, झंडी, कांवड़, मंदिरों में सजावट के के लिए फूलों की की मांग बढ़ जाती है। साथ ही ट्रैवल व्यवसाय में भी गति देखने को मिलती है।
फूलों के कारोबार को मिलती है गति
गुरु नगरी के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक दुर्ग्याणा मंदिर परिसर और लोहगढ़ चौक सहित शहर के अन्य स्थानों पर फूल बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि वैसे तो फूलों की बिक्री वर्षभर होती रहती है, लेकिन सावन के महीने में फूलों की मांग चार से पांच गुणा बढ़ जाती है। सोमवार के दिन कई बार स्थित ऐसी बन जाती है कि दुकानों पर फूलों की कमी आ जाती है। फूलों के कारोबारी बताते हैं कि इस माह खास करके मोगरा, अपराजिता और गुलाब के फूलों की मांग ज्यादा होती है। इसके साथ बिल्वपत्र की भी मांग होती है। वैसे तो भगवान शिव की पूजा में केतकी और केवड़ा के फूलों को छोड़ कर सभी तरह के पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं।
हरे रंग की चूड़ियों की बढ़ी मांग
चूड़ियों का कारोबार करने वाली सुमन कुमारी कहती हैं, वैसे तो सभी रंगों की चूड़ियां बारहो माह बिकती हैं, लेकिन सावन से लकर हरियाली तीज तक हरे रंग की चूड़ियों कि मांग ज्यादा होती है। वे कहती हैं, सावन का महीना हरियाली वाला होता है। यानि पूरी तरह से प्रकृति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार सावन मास में महिलाओं के लिए हरे रंग का वस्त्र, चूड़ियां और सजना-सवंरना शुभ माना गया है।
कांवड़ का कारोबार जोरों पर
हरिद्वारा से गांगा जल लाने के लिए कांवड़ियों की टोलियां भी निकल पड़ी हैं। कांवड़ियों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। ऐसे में कांवड़ की मांग बढ़ गई है। राम बाग में बांसों का कारोबार करने वाले व्यपारियों का कहना है कि 200 से 250 रुपये में कावंड़ तैयार कर दी जाती है। कांवड़ को सजाने के लिए जैसे डमरू, प्लास्टिक फूल, झंडियां आदि भी रामबाग में सुगमता से मिल जाती हैं।
शहर के शिव मंदिरों में विशेष प्रबंध
गुरु नगरी के सभी शिव मंदिरों में भक्तों के लिए विशेष प्रबंध किए गए है। शिवाला मंदिर प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार आम दिनों की अपेक्षा सावन और वह भी सोमवार भक्तों की भीड़ी अधिक होती है। इसके देखते हुए उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए खास व्यवस्था की गई है। कुछ इसी तरह रानी का बाग स्थित प्राचीन शिवाला, शिवाला भूतनाथ, शंकराचार्य मंदिर सहित कई अन्य प्रमुख मंदिर हैं जहां सावन के सोवार को शिवभक्तों के आस्था का सागर उमड़ पड़ता है।
