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उत्तर प्रदेश

भ्रष्टाचार के विरुद्ध समाजसेवी पहुंचें, डीएम गाजीपुर के दरबार में नही 0हुई सुनवाई; बैठे आमरण अनशन पर

गाजीपुर। देवा गाजीपुर जानिए कब और कहां और कैसे l सामाजिक कार्यकर्ता बोधा जायसवाल गरीबों की हक की लड़ाई लड़ने वाले सरकार के सामने गरीबों के हक के लिए अनेको बार आमरण अनशन किये। न्याय न मिलने के कारण 15 अगस्त 2020 ई0 को आत्मदाह की सरकार को चेतावनी दी थी। education

जिसके उपरांत सीडीओ श्री प्रकाश गुप्ता एवं डीपीआरओ अनिल सिंह के द्वारा दिनांक 9 जुलाई 2020 ई0 को समाजसेवी बोधा जायसवाल को विकास भवन गाज़ीपुर में तलब किया गया था। समाजसेवी ने अधिकारियों के समक्ष भ्रष्टाचार की खुली चुनौती दिया था। जिसे सीडीओ गाजीपुर ने स्वीकार किया। ( Breaking news )

समाजसेवी को आपत्ति पत्र दाखिल करने का 4 दिन का समय दिया 12 बिंदुओं का आपत्ति पत्र देने के बाद दिनांक 7 अगस्त 2020 ई0 को डीपीआरओ अनिल सिंह एडीपीआरओ रमेश उपाध्याय, डीपीआरओ असिस्टेंट बृजेश कुमार, जखनिया के एडीओ पंचायत फ़ैज़ अहमद एवं ग्राम विकास अधिकारी (सिगरेटरी) अनिल दुबे इन सक्षम अधिकारियों के समक्ष खड़ंजा और शौचालय की जांच की गयी।

https://vidyapandit.com/2020/11/09/i-get-very-angry-at-myself-when-a-serious-case-like-killing-someone-is-not-traceable/

जिसमें हर बिंदुओं पर अनियमतता पाया गया। खड़ंजा के ऊपर ₹165317-रूपये रिकवरी का आदेश हुआ। सरकार के तरफ से 218 शौचालय बनवाने का धन ग्राम प्रधान को ग्राम निधि में प्राप्त हुआ था। जांच के दौरान केवल 103 ही शौचालय आधा अधूरा बना दिखाई दिया। शेष 115 शौचालय धरातल पर दिखाई नहीं दिया।

शेष शौचालय बनवाने का समय ग्राम प्रधान दुखनी देवी को 2 महीने का दिया गया। तत्पश्चात 21 अगस्त 2020 ई 0 को डीएम गाजीपुर के द्वारा ₹165317- रुपया रिकवरी व साथ ही में प्रधान का खाता सीज व सस्पेंड करनेेेे का आदेश हुआ।

समाजसेवी बोधा जायसवाल ने महीनों समय बीतने के बाद कार्यवाही ना होने के कारण शौचालय निर्माण कार्य ना होने के कारण समाजसेवी ने 02अक्टूबर 2020 ई0 को आमरण अनशन करने की घोषणा किया।

शासन व प्रशासन के द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर को समाजसेवी को गिरफ्तार कर लिया गया। थाना दुल्लहपुर के प्रांगण में उप जिला अधिकारी जखनिया सूरज यादव एवं थानाध्यक्ष दुल्लहपुर के समक्ष वार्तालाप होने पर उप जिला अधिकारी ने सभी बिंदुओं का निस्तारण के लिए 1 महीने का समय मांगा, और जिला अधिकारी के आश्वासन पर समाजसेवी ने जिला अधिकारी महोदय के सम्मान में 2 महीने का समय दिया।

23 अक्टूबर 2020 को एडीपीआरओ बृजेश कुमार के द्वारा शौचालय की जांच की गई। जिसमें 75 शौचालय धरातल पर दिखाई नहीं दिया। जिसका ₹900000-नौ लाख का गबन दिखाई दिया। उप जिलाधिकारी के द्वारा दी गई।

समय सीमा समाप्त होने के उपरांत किसी बिंदु पर कार्यवाही ना होने की वजह से समाजसेवी बोधा जायसवाल ने पुनः आत्मदाह करने की घोषणा की सभी अधिकारी गण आनन-फानन में एलआईयू स्पेक्टर गाजीपुर सुधीर दुबे जी के द्वारा 9 नवंबर 2020 ई0 को जिला अधिकारी के समक्ष पेश करने का मौखिक डेट मिला।

गरीबों की हक की लड़ाई लड़ने वाले समाजसेवी बोधा जायसवाल आज जिला मुख्यालय पहुचे, और डीएम से बात करनी चाही। लेकिन अधिकारियों के संज्ञान में होने पर भी जिलाधिकारी एम. पी. सिंह महोदय के समक्ष बोधा जायसवाल को अपनी बात ऱखने का मौका नही दिया गया। बताते चले जिलाधिकारी महोदय के समक्ष समाज सेवी को 9 नवंबर 2020 ई0 को गरीबों के हक के लिए अपना सभी दस्तावेज को पेश करना था।

क्यों जिलाधिकारी मिले पर बात नही किये। यदि न्याय नहीं मिला तो सरजू पाण्डेय पार्क मे आमरण अनशन के लिए बाध्य हो गये। इसकी सूचना बोधा जायसवाल पहले ही दे चुके थे।अनशन के दौरान कोई घटना दुर्घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। आखिर बोधा जायसवाल ने सरजू पाण्डेय पार्क गाजीपुर में अपना आमरण अनशन एकला चलो के सिद्धांत पर शुरू कर दिया। देखिए सिस्टम इनके साथ क्या करता है। https://thejharokha.com







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