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उत्तर प्रदेश

मुख्तार के दोनों बेटों की गिरफ्तारी पर रोक

लखनऊ ः यह खबर मुख्तार अंसारी के लिए लिए मुख्तार अंसारी के लिए  थोड़ी सुकून ला सकती है । क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पूर्वांचल के माफिया डॉन व म ऊ के विधायक मुख्तार अंसारी की दोनों बेटों की गिरफ्तारी को फिलहाल रोक लगा लगा दिया है । उल्लेखनीय है कि अंसारी के दोनों बेटे अब्बास और अंसारी पर 25 ₹25000  के इनाम घोषित कर रखे थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में मुख्तार अंसारी के दोनों बेटों की लखनऊ के डाली बाग स्थित एक शत्रु संपत्ति पर निर्माण करने के आरोप में दर्ज कराई गई प्राथमिकी की सुनवाई के दौरान लगाई गयी। यह आदेश न्यायधीश डीके उपाध्याय और संगीता यादव के पीठ ने अब्बास अंसारी और उमर अंसारी याचिका पर पारित किया है । साथी ही कोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते के भीतर अपना प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का भी आदेश दिया है।

बताया जा रहा है कि क्या चीन की ओर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर एच डी एस एस परिहार और अरुण सिन्हा ने रखा। मथुरा तर्क दिया प्राथमिकी को ध्यान से पढ़ने पर है पता चलता है कि इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई अपराध नहीं बनता। उन्होंने कहा कि जब अपराध कार्य करने की बात कहीं जा रही है तब तो याचिकाकर्ताओं का जन्म भी नहीं हुआ था इसलिए यह प्राथमिकी दो भावना के कारण कारण दिखाई गई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं जेएन माथुर , एचजीएस परिहार व अरूण सिन्हा ने पक्ष रखा। माथुर ने तर्क दिया कि प्राथमिकी को पढ़ने से ही याचियेां के खिलाफ प्रथम  दृष्टया केाई अपराध नहीं बनता । उन्होंने कहा कि जब अपराध कारित करने की बात कही जा रही है तब तेा याचियेां का जन्म भी नहीं हुआ था। कहा गया कि दुर्भावना के कारण प्राथमिकी लिखायी गयी है।

वहीं महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिका पोषणीय नहीं है क्योकि याचीगण कोर्ट के सामने क्लीन हैण्ड से नहीं आये हैं । उन्हेाने यह भी तर्क दिया कि याची अग्रिम जमानत का आवेदन कर सकते हैं अतः उन्हें रिट दायर कर प्राथमिकी केा चुनौती देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने महाधिवक्ता के सारे तर्को को नकार दिया ।







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