गन्‍ने की खेती बनाए खुशहाल

गन्‍ने की खेती नकदी की फसल कही जाती है। इसकी बिजाई फरवरी के मध्‍य से मार्च के अंत तक की जाती है। इसकी कटाई नवंबर से शुरू हो जाती है जो जनवरी के अंत तक चलती है। आठ नौ माह में तैयार होने वाली नकदी की इस इस फसल को किसानों की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

0
गन्‍ने की खेती बनाए खुशहाल

फीचर डेेेेेस्‍क

गन्‍ने की खेती नकदी की फसल कही जाती है। इसकी बिजाई फरवरी के मध्‍य से मार्च के अंत तक की जाती है। इसकी कटाई नवंबर से शुरू हो जाती है जो जनवरी के अंत तक चलती है। आठ नौ माह में तैयार होने वाली नकदी की इस इस फसल को किसानों की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। गन्‍ने के गिरते रकबे को राज्‍य बढाने व उत्‍पादन व खपत के समीकरण को संतुलित रखने के लिए विभिन्‍न दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। गन्‍ने का रकबा बढाने के किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ’साथ उन्‍नतशील बिजों से बिजाई करने के लिए भी क़षि विभाग व क़षि विश्‍वविद्यालयों का समय समय पर किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। खालसा कालेज अम2तसर के क़षि विशेषज्ञ डा: रजिद्रपाल सिंह कहते हैं कि बुआई के समय कुछ बातों पर अमल कर किसान अच्‍छी उपज के साथ अच्‍छा मुनाफा कमा सकते हैं।

उन्‍नतशील किस्‍म के बीजों का करें चयन

डा: राजिंद्र पाल सिंह के अुनसार गन्‍नें के उपर का दो तिहाई भग जो कि स्‍वस्‍थ तथा कीट व रोग रहित हो बिजाई के लिए उत्‍तम माना जाता है। गन्‍ने के इस भाग की बिजाई कर सही गुणवत्‍ता वाला गन्‍ना प्राप्‍त किया जा सकता है। बिजाई के लिए दो व तीन आंखों वाली पोरियों का इस्‍तेमाल करें। 30 से 40 सेमी के टुकडे की बिजाई करें। एक एकड के लिए बीज की मात्रा 30 से 40 क्विंटल प्रयोग करें। दो से तीन आंखों वाली पोरियों की वंख्‍या प्रति एकड 35 तथा 22 हजार समान्‍य स्थिति में पार्याप्‍त पौधों की भर्ती के लिए उपयुक्‍तम रहती है।

ऐसे करें बीज का शोधन

खालसा कॉलेज की ही एग्रीकल्‍चर डिपार्टमेंट की डेह डा: रणवीर कौर वल कहती हैं कि बिजाई से पहले गन्‍ने की पोरियों का शोधन होना आवश्‍यक है। पोरियों को एमीसान या मेंकोजेब के 0:25 प्रतिशित घोल में चार या पांच मिनट तक डुबोकर रखें। एक एकड खेत की बिजार्इी के लिए समस्‍त पोरियों के उपचार के लिए लिए एक क्विंटल यानी 100 लीटर पानी का इस्‍तेमाल करें। बिजों का उपचार करते समय रबर के गल्‍बस अवश्‍य पहनें।

बिजाई का समय

गन्‍ने की बिजाई का सही समय मध्‍य फरवरी से मार्च के अंत तक का माना गया है। इस फसल के साथ ग्रीष्‍मकालीन मूंग या उडद या हल्‍दी या सब्जियाें की काश्‍त कर किसान अतिरिक्‍त आमदनी कर सकते हैं।

खेत की तैयारी व बुआई की विधि

खेत को अच्‍छी तरह खरपतवार विहीन व ढेले रहित तैयार करें। पानी बचाने के लिए जेजर लैवलर की सहायता से खेत बराबर करें। गन्‍ने की बिजाई के लिए पंक्‍ित से पंक्‍ित की दूरी 60 सेमी रखें। इसकी काश्‍तम मेंढे बनाकर भी कर सकते हैं। खेत की मिटटी की भौतिक अवस्‍था ठीक रखने, जीवांश बनाए रखने व बढाने तथा पानी की उपलब्‍धता को सुचारू बनाने और पोषक तत्‍वों को उचित मात्रा में प्रदान करवाने के लिए बिजाई के दो या तीन सत्‍ताह पूर्व गोबर की खाद या कंपोस्‍ट खाद छह से आठ टाली प्रति एकड खेत में एक बरार बिखेर कर मिलाएं। जैविक खाद के रूप में एजोटोबैक्‍टर, फास्‍को बैक्‍टीरिया तथा एस्‍टोबैक्‍टर का प्रयोग अवश्‍य करें। इससे खाद की खपत में भी कमी हो सकती है। गन्‍ना बिजाई यंत्र की सहायाता से बिजाई करें। गडढा विधि से भी बिजाई कर सकते हैं। जमाव जल्‍दी, बराबर व पांच से दस प्रतिशत अधिक प्राप्‍त करने के लिए खेत की अच्‍दी तैयारी के बाद गन्‍ने की पोरियों को सूखे खुडों में बिजाई करके व परोरियों को हल्‍की मिटटी से ढकने के बाद हल्‍का’हल्‍का पानी लगाएं।  समय’समय पर जरूरत के अनुसार इसे खाद व पानी देते रहें। जून के बाद गन्‍ने में नाईट(ोजन का प्रयोग न करें।

गन्‍ने की फसल को मिल तक ले जाते किसान। स्रोत सोशल साइट्स

खरपतवार नियंत्रण  

किसान को खरपतवार नियंत्रण के लिए समन्वित खरपतवार नियंत्रण  प्रणाली अपनानी चाहिए। इसके तहत डेढ लीटर एट(ाजीन 50 डब्‍ल्‍यूपी प्रति एकड 250 से 300 लीटर पानी में घेलकर बिजाई के दो या तीन दिन छिडकाव करें। ढटजीन का प्रयोग गन्‍ने की खडी फसल में निराई गुडाई के बाद अच्‍छी नमी की स्थिति में भी कर सकते हैंत। डा: बल कहती हैं कि मोथा की समस्‍या से निजात पाने के लिए 2, 4 डी एस्‍टर का 400 ग्राम प्रति एकड के हिसाब से छिडकाव करें। निराई गुडाई खरपतवार नियंत्रण का सही तरीका है।

सिंचाई प्रबंध

मौसम को देखते हुए व नहर में पानी उपलब्‍धा के अनुसार बिजाई के लगभग 40 दिन बाद पहला पानी लगाएं। मानसून से पहले व बाद में लगभग डेढ तथा साढे तीन सप्‍ताह के अंतर से सिंचाई करें। सीओजे 64 किस्‍म में सिंचाई के लिए किसानों को विशेष धान देना चाहिए। गन्‍ने में कनसुआ, दीमक तथा चोटी बेधक कीडो से होने वाले नुकसान को कम करने लिए किसानों को गर्मियों के महीनों में सुव्‍यवस्थित सिंचाई करनी चाहिए।

मिटृी चढ़़ा़ाना व बंधाई भी जरूरी

डा: रजिंद्र पाल सिंह कहते हैं कि गन्‍ने को गिरने से बचाने के लिए मई तथा जून में मिटटी चढ1ाए। अगस्‍त व सिंतबर के महनाीं में गन्‍ने की बंधाई करें।

कटाई

आगे अधिक ग्रोथ लेने के लिए फसल की कटाई जमीन सतह के साथ करें। कटाई के बाद पत्तियों को जला दें। इन सभी क्रियाओं को पना कर किसान गन्‍ने की पैदावार बढा कर अधिक से अधिक लाभ कमा सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here