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Punjab New: गणेश उत्सव से पूर्व संस्कृत परिषद ने की शिक्षा मंत्री से मुलाकात, संस्कृत को फिर मिलेगा सम्मान

Sanskrit Parishad met the Education Minister before Ganesh Utsav, Sanskrit will get respect again

पंजाब भवन चंडीगढ़ में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को ज्ञापन देते हुए संस्कृत कॉलेज अमृतसर के प्राचार्य डॉ पुष्पराज तथा संस्कृत परिषद का उच्च स्तरीय शिष्ट मंडल.

झरोखा न्यूज, चंडीगढ़ : अखिल भारतीय संस्कृति विकास परिषद (स्थापित लाहौर 1841) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शिवकुमार प्रेम के दिशा निर्देश पर परिषद का एक उच्च स्तरीय शिष्ट मंडल राष्ट्रीय महासचिव अशोक शर्मा तथा राष्ट्रीय सह–अध्यक्ष सुरेश पुंज की अध्यक्षता में पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को पंजाब भवन चंडीगढ़ में मिला, जिसमें उन्हें पंजाब में संस्कृत की दयनिय स्थिति से अवगत करवाया।

इस दौरान प्रतिनिधमंडल ने बताया कि पंजाब में संस्कृत के कई कालेज बंद हो चुके हैं। यहां तक कि स्कूलों और कालेजों में भी संस्कृत नहीं पढ़ाई जा रही है। कुछ एक कालेजों में यदी पढ़ाया भी जाता है तो नाम मात्र का। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती संस्कृत और संस्कृति की जननी रही है। इसलिए पंजाब में संस्कृत को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और बंद हो चुके कालेजों को फिर से शुरू किया जाना चाहिए। इस दौरान प्रतिनिध मंडल ने शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस से संस्कृत को प्रोत्साहित करने के लिए चार मांगें रखी जो इस प्रकार हैं-

प्रमुख मांगे

  • पंजाब में 6वीं से 12वीं तक संस्कृत विषय को पढ़ाया जाए तथा पहले की तरह संस्कृत के अंकों को कुल अंकों में भी जोड़ा जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र संस्कृत विषय पढ़ सकें।
  • हाई स्कूलों, सीनियर सेकेंडरी स्कूलों तथा कॉलेजों में संस्कृत के शिक्षकों को नियुक्त किया जाए।
  • यहां हिंदी, पंजाबी तथा उर्दू की अकादमी है, परंतु संस्कृत की कोई अकादमी नहीं है। इसलिए संस्कृत की अकादमी खोली जाए ताकि वहां उच्च स्तर पर संस्कृत संबंधी शोधकार्य तथा अन्य संस्कृत से संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन हो सके।
  • पंजाब के संस्कृत कॉलेजों एवं गुरुकुलों को जो पंजाब सरकार द्वारा डी.पी. आई. (कॉलेजेज) के माध्यम से जो ग्रांट मिलती थी,वह 2009–10 से बंद हैं । उसे शुरू किया जाए तथा प्रत्येक कॉलेज व गुरुकुल को 24 लख रुपये की ग्रांट (अनुदान) प्रति वर्ष दी जाए।

शिक्षा मंत्री ने संस्कृत अकादमी खोलने का दिया भरोसा, कहा’- नियुक्त किए जाएंगे शिक्षक

शिक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत के अंकों को कुल अंकों में क्यों नहीं जोड़ा जाता है इसका पता किया जाएगा तथा जो भी आवश्यक होगा, उसमे संशोधन किया जाएगा तथा आगे से संस्कृत की पोस्टें भी निकाली जाएगी । शीघ्र ही संस्कृत अकदमी खोली जाएगी। इस के लिए जगह का चयन किया जाएगा । गुरुकूलों को जो भी ग्रांट मिलती थी, वह क्यों बंद की गई थी, डी. पी. आई (कॉलेजेज) से पूछा जाएगा एवं उसे ग्रांट को पुन: शुरू किया जाएगा।

सरकारी स्तर पर उठाए जाएंगे आवश्यक कदम – शिक्षा मंत्री

उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर जो–जो कदम उठाने होंगे उन्हें उठाया जाएगा । परंतु सामाजिक स्तर पर जो–जो कदम उठाने होंगे उन्हें उठाया जाएगा। परंतु सामाजिक स्तर पर तो आप लोगों को है इस सर्वाधिक प्राचीन भाषा का सामाजिक, धार्मिक, वैज्ञानिक एवं आर्थिक महत्व समझाना होगा। संस्कृत के प्रति जन जागरण के कार्य को सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं ही कर सकती हैं। उसके लिए अखिल भारतीय संस्कृति विकास परिषद अग्रणी भूमिका निभा सकती है।

संस्कृत पढ़ने वालों की संख्या बढ़ने पर रखे जाएंगे शिक्षक

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जहां-जहां स्कूलों में संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ेगी वहां-वहां सरकार क्रमवार संस्कृत शिक्षकों की नियुक्तियां भी करेगी। इस पर परिषद ने कहा कि पहले सरकार संस्कृत अंकों को कुल अंकों में जोड़ने का नोटिफिकेशन जारी करें,फिर संस्कृत शिक्षकों की नियुक्तियां की जाएं।

प्रतिनिधि मंडल में ये रहे मौजूद

इस अवसर पर संस्कृत कॉलेज नाभादास जिला कॉलेज खन्ना के पूर्व प्राचार्य निगम स्वरूप आचार्य श्री लक्ष्मी नारायण संस्कृत कॉलेज अमृतसर के प्राचार्य डॉक्टर पुष्पराज शर्मा पंजाब संस्कृत संबर्धन समिति के अध्यक्ष ओमन देव, हैप्पी शर्मा, पवन मलकोटी, कपिल देव, प्रहलाद शर्मा, कमल शर्मा, शिव कुमार, सुरेंद्र शर्मा आदि उपस्थित थे।







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