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हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा, कृषि सुधार कानून पर मुट्ठीभर लोग किसानों को कर रहे हैं भ्रमित

हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा, मुट्ठीभर लोग किसानों को कर रहे हैं भ्रमित

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर। स्रोत : सोशल साइट्स

hariyaana ke mukhyamantree khattar ne kaha, krshi sudhaar kaanoon par muttheebhar log kisaanon ko kar rahe hain bhramit

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सरकार में आते ही वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए तीन नए कृषि कानून बनाए गए हैं, ताकि किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाया जा सके।

नारनौन के किसानों ने हाथ उठाकर किया कानून का समर्थ

मुख्यमंत्री नारनौल के आईटीआई मैदान में जल अधिकार रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘हरियाणा ने ठाना है, एसवाईएल का पानी लाना है’ नारों के बीच केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों के संबंध में प्रदेश के किसानों की भ्रांतियां दूर कीं। मुख्यमंत्री ने बारी-बारी से तीनों कानूनों पर रैली में आए किसानों के समक्ष अपनी बात रखी। किसानों ने दोनों हाथ उठाकर इन तीनों कानूनों पर अपने समर्थन की मोहर लगाई।

सात लाख लोगों तक पहुंचा कृषिमंत्री का पत्र

मनोहर लाल ने कहा कि कुछ मुठ्ठीभर लोग ही इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं जिन्हें कुछ राजनीतिक दल भ्रमित कर रहे हैं। हमने किसानों को समझाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर का आठ पेज का पत्र सात लाख लोगों तक पहुंचाया है। इस पत्र को किसान भाई ध्यान से पढ़ें। विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही गलतफहमियां दूर हो जाएंगी।

कृषि सुधार कानून के समर्थन में किसानों ने निकाली ट्रैक्टर रैली

रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में गत दिनों प्रदेश के सभी जिलों के 32 हजार किसानों ने सत्याग्रह किया। किसानों ने इन कानूनों के समर्थन में ट्रैक्टर रैली निकालकर प्रधानमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है। किसान जानते हैं कि बदलाव के बिना उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो सकती।

आजादी के बाद से किसानों को नहीं मिला उनका हक

उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा यथास्थिति बनाए रखने में विश्वास करती है। यही कारण है कि देश की आजादी के बाद से किसान को उसका हक नहीं मिल पाया। हम किसानों की आय बढ़ाने के लिए भंडारण व बिक्री व्यवस्था को सुधारना चाहते हैं तो कुछ राजनीतिक दल किसानों की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।

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