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कारसेवक चंद्रमा कुशवाहा ने कहां 1990 में जब कारसेवकों पर चली थी गोलियां जिसे देख कांप गई थी रुह

कारसेवक चंद्रमा कुशवाहा ने कहां 1990 में जब कारसेवकों पर चली थी गोलियां जिसे देख कांप गई थी रुह

रजनीश कुमार मिश्र ( गाजीपुर) विश्व हिन्दू परिषद के आवाह्न पर सन् 1990 में पुरे देश में कारसेवा शुरू किया गया । जिसमें देश भर से रामभक्त अयोध्या के लिए कुंच किया था । उन्हीं कारसेवकों में शामिल थे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के बाराचवर निवासी तत्कालीन विश्व हिन्दू परिषद के ब्लाक अध्यक्ष रहे चंद्रमा कुशवाहा जिन्होंने ने नब्बे के दशक में हुए जुल्म को बयां किया । उसे दर्द को बयां करते हुए चंद्रमा कुशवाहा के आखें आज भी भर आई । कारसेवक चंद्रमा कुशवाहा ने बताया की जब विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष के द्वारा मुझे सूचित किया गया की आप को कारसेवा में रामभक्तों के साथ शामिल होना है । तब उस समय सैकड़ों लोग कारसेवा के लिए शामिल हुए जिनका पुरा डिटेल लिया गया था ।

गाजीपुर जनपद से गये थे करीब पांच हजार रामभक्त

विश्व हिन्दू परिषद के जिला महामंत्री व कारसेवक चंद्रमा कुशवाहा ने बताया की जिस समय अयोध्या से विश्व हिन्दू परिषद द्वारा सूचना दी गई की अयोध्या के लिए कुंच करना उस समय गाजीपुर जनपद से करीब पांच हजार रामभक्त गये हुए थे । अगर बाराचवर की बात की जाएं तो इस क्षेत्र से करीब दो सौ के रामभक्त कारसेवा में शामिल थे । उन्होंने बताया की सन् 1990 में जो कारसेवा हुआ था उस दौरान पुरे देश से लोग अयोध्या पहुंच रहे थे । जिसे देख तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व मुलायम सिंह ने कहां था की अयोध्या में एक परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा ।

उग्र हो गये थे रामभक्त

चंद्रमा कुशवाहा ने बताया की अयोध्या में पहुंचे कारसेवक शांति से हनुमानगढ़ी में बैठ अशोक सिंहल का भाषण शुन रहे थे । इसी दौरान मुलायम सिंह ने एक भाषण दिया की अयोध्या में एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता । उनके द्वारा दिया गया ये भाषण की जैसे ही रामभक्तों को जानकारी हुई कारसेवा कर रहे रामभक्त उग्र हो गये । उन्होंने बताया की हम लोग तो सिर्फ विवादित ढांचे पर झंडा लगाने वाले थे । उन्होंने बताया की रामभक्तों के उग्र होने पर अशोक सिंहल द्वारा सबको शांत कर लिया गया था । शांति के साथ ढाचे पर केशरिया झंडा लगाया जाना था ।

पुलिस की गोलियों से हुई थी कोठारी बंधुओं की मौत

1990 के दौर में कारसेवकों में शामिल चंद्रमा कुशवाहा ने बताया की जिस समय देश के कोने कोने से लोग अयोध्या में आये हुए थे । तब हिन्दू संगठनों जिसमें बजरंग दल , विश्व हिन्दू परिषद आदि संगठनों ने तय किया की तीस अक्टूबर को हम लोग राम लला का दर्शन करने जायेंगे तब उस दौर के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने कहां था की एक परिंदा भी पर नहीं मारेगा । उसके बाद भी कारसेवक पहुंचे थी । उन्होंने बताया की तीस अक्टूबर को तो गोली नहीं चली लेकिन दो नवम्बर को छावनी लाईन से कुछ कारसेव रामलाला दर्शन करने के लिए नारे लगाते हुए चल पड़े ।

तब मुलायम सिंह का आदेश आया की इन कारसेवकों को किसी तरह रोकों नहीं मानते है तो गोली चलाओ आदेश मिलते ही पुलिस प्रशासन द्वारा दनादन कारसेवकों पर गोलियों की बौछार कर दी गई । पुलिस की गोलियों से बहुत कारसेवक शहिद हुए । उन्होंने बताया की जब गोलियां चल रही थी तब चारों तरफ का मंजर भी भयावह था । वो घटना आज भी जेहन में आती है तो रूह कांप जाती है । चंद्रमा कुशवाहा ने बताया की पुलिस की गोली से कलकत्ता से आये दो सगे भाई रामकुमार कोठरी व शरद कोठरी विवादित ढाचे पर झंडा लगाते हुए शहिद हो गये थे ।

रामलला का मंदिर बनने से बलिदान हुआ सार्थक

कारसेवक चंद्रमा कुशवाहा ने कहां की सन् 1990 में शहिद हुए कारसेवकों का बलिदान अब सार्थक हो गया । उन्होंने कहां की जो अयोध्या में राम मंदिर बन कर तैयार है । ऐसा मंदिर कही भी नहीं है । उन्होंने कहा की अब करीब पांच सौ साल बाद भगवान राम अपने घर में विराजमान होंगे । देश के सभी लोग प्रभु राम का 22 जनवरी के बाद जाकर दर्शन करे । उन्होंने कहां की जो सपना हम और हमारे जो राम भक्त आज इस दुनिया में नहीं है उनका सपना 22 जनवरी को पुरा हो जायेगा।







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