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आलू ने बढ़ाई किसानों की चिंता, वजह जानेंगे तौ रह जाएंगे हैरान

सब्जियों का मामा कहे जाने वाले आलू ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यह चिंता मौसम या फसल में खराबी को लेकर नहीं है। बल्कि इसकी वजह आलू बंपर उत्पादन है। इस वर्ष अच्छे पैदावार के चलते आलू का मूल्य करीब 50 फीसद सस्ता हो गया है। यह खबर उपभोक्ताओं के लिए अच्छी जरूर पर आलू उत्पादकों के लिए ठीक नहीं कही जा सकती।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खपत और उत्पाद दोनो ही क्षेत्रो में इस वक्त आलू पांच रुपये से छह रुपये प्रति किलो के दर से बिक रहा है। इससे आलू के खरीददारों को तो लाभ हुआ है, पर इसके उत्पादक किसानों को लागत मूल्य भी निकालने में परेशानी हो रही है।
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में कुल 60 मुख्य आलू उत्पादक क्षेत्र हैं।

इसमें से 25 क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां आलू के दाम पिछले साल की अपेक्षा 50 फीसद कम हुई है। ये प्रमुख क्षेत्र पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर पदेश, कर्नाट, पंजाब और हिमाचल प्रदेश हैं। आंकड़ों में मुताबिक उत्तर प्रदेश के संभल और गुजरात के दीशा में आलू की कीमत तीन साल के औसत थोक भाव छह रुपये किलो से भी कम हो गई है। हालत यह है कि खुदरा बाजार में भी आलू के भाव पचास प्रतिशत से अधिक गिरा है।

पिछले साल थोक में आठ से नौ रुपये किलो बिक रहा था आलू

आंकड़ों पर गौर करें तो यही आलू पिछले साल उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में माच में आठ से नौ रुपये किलो के भाव से थोक में बिका था। जबिक कुछ जिलों में इसकी कीमत दस रुपये प्रतिकिलो से अधिक थी। यही नहीं गत वर्ष तो आलू की बोली 23 रुपये किलो तक लगी थी।

लागत भी नहीं निकल रही

आलू उत्पादक किसानों का कहना है कि एक एकड़ में आलू की खेती करने पर करीब करीब 65 से 70 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें खेत तैयार करने से लेकर आलू की खोदाई करने तक का खर्च शामिल है। किसानों के मुताबिक एक एकड़ में लगभग दो सौ बोरी यो 50-50 किलो के आलू पैदा होता है। जबिक मौजूदा समय में आलू के दाम गिरने से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ का भाव आ रहा है। इस तरह आलू की खेती घाटे का सौदा ही साबित हो रही है। (आलू )




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