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जानें भगवान Shri Ram की वह सात खुबियां जिन्हें अपनाने से जीवन संवर जाएगा

जानें भगवान Shri Ram की वह सात खुबियां जिन्हें अपनाने से जीवन संवर जाएगा

सिद्धार्थ मिश्र : शारदीय नवरात्र शुरू होते ही हर शहर, हर गांव में राम लीलाएं शुरू हो जाती हैं। हम बड़े चाव से राम लीलाएं देखते हैं। यहीं नहीं Shri Ram श्री राम की पूजा भी अपना आराध्य मानकर करते हैं। प्रभु श्री राम को आदर्श पुरुष या मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहते हैं। यहां तक कि एक दूसरे का अभिवादन भी राम राम या जै राम जी करके करते हैं। यदि किसी का अंतिम संस्कार करने जाते हैं तब भी -‘राम नाम सत्य है’ कहते हैं।

यानी जीवन के आरंभ से अंत तक Shri Ram श्री राम का नाम लेते हैं, लेकिन क्या कभी Shri Ram राम के आदर्शों को अपनाने की कोशिश करते हैं। अपनी अंतर आत्मा को टटोलकर देखें तो जवाब मिलेगा नहीं। यदि Ram राम के कुछ आदर्शों को अपना लें तो जीवन संवर जाएगा। आइए जानते हैं भगवान Shri Ram के वह कौन से आदर्श हैं जिन्हे हर व्यक्ति को अपनाना चाहिए।

गुरु की आज्ञा मानने वाले राम

भगवान श्री राम महाराज दशरथ पुत्र होते हुए भी एक साधारण बालक की हमेशा गुरु की आज्ञा का पालन करते रहे। चाहे वह गुरु वशिष्ठ हो यां विश्वामित्र। ताड़का वध के लिए जब महामुनी विश्वामित्र Shri Ram और लक्ष्मण को बक्स लेकर आए तब भगवान Shri Ram राम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से ही ताड़का का वध किया। इससे पहले वह कहते हैं मैं दशरथ नंदन राम Ram गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से ताड़का वध कर रहा हूं। इसी तरह जब वह सिता स्वयंवर में पहुंचते हैं तो वहां भी वह गुरु विश्वामित्र की आज्ञा लेकर ही शिव धनुष तोड़ते हैं।

शालीनता के प्रतीक

श्री राम शालीनता के प्रीत भी हैं। सीता स्वयंर में शिव धनुष टूटने के बाद जब क्रोधित परशु राम जनक की सभा में पहुंचते हैं और क्रोधित हो कर जब शिव धनुष तोतड़ने वालें को पूछते हैं कठोर वचनों का प्रयोग करते हैं तो श्री बहुत ही शाली तरीके के कहते है-
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयसु काह कहिअ किन मोही।

आज्ञकारी पुत्र श्री राम

भगवान विष्णु का सातंवा अवतार होते हुए भी भगवान श्रीराम राम का जीवन एक साधारण व्यक्ति की तरह था। भगवान Shri Ram एक आज्ञाकारी पुत्र भी थे। घर में भगवान Shri Ram के राज्या भिषेक की तैयारी चल रही होती है। उनकी सौतेली मां कैकेई अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा बनाना चाहती हैं। इसके लिए वह Shri Ram को 14 साल के लिए वन भेजना चाहती हैं। यह बात जब Shri Ram राम को पता चलती है तो वह सहर्ष वन जाने को तैयार हो जाते हैं।
Shri Ram श्री राम माता कैकेई से कहते हैं – ‘सुनु जननी सोई सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी।

एक पत्नी व्रता श्री राम

भगवान श्री राम एक पत्नी व्रता भी हैं। शायद उनके इसी गुण को देख इस नारि भगवान श्री राम की तरह ही पति चाहती है। श्री राम के पिता दशरथ की खुद तीन पत्नियां थी। श्री राम भी चाहते तो कई विवाह कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने सीता का वरण किया और ता उम्र उन्हीं के हो कर रहे।

भ्रातृत्व प्रेम

श्री राम अपने तीनों भाइयों से अगाधा प्रेम करते थे। इसी तरह उनके तीनों भाई भी थे। भरत को राज्य जरूर मिला लेकिन भरत कभी अयोध्या के सिंहासन पर नहीं बैठे। वह श्री राम के वन से लौटने तक उनकी चरण पादुका की पूजा करते रही। इसी तरह श्री राम भी भरत को अपना सबसे प्रीय भाई कहते थे।

क्षमाशील श्री राम

श्री राम क्षमाशील भी थे। बाली वध के बाद जब सुग्रिव अपना वचन निभाना भूल गए उस समय श्री राम आक्रोशित हुए पर उन्होंने सुग्रिव को क्षमा भी कर दिया। यही नहीं वन से लौटने के बाद उन्होंने अपनी माता कौशल्या से पहले कैकेई से मिले और खुद कैकेई से मिले। और आत्मग्लानी की अग्नी में जल रहीं कैकेई को उसे बोध मुक्त करवाया।

सबको गले लगाया

समाज वाद के सच्चे प्रतीत भगवना श्री राम ने केवट, निषाद राज, सबरी, जटायु यानि जो उनके मिला उन सभी को आगे बढ़ कर गले लगाया।
सच में भगवान श्री राम की यह खूबियां अगर हम अपना लें से जीवन संवर ही नहीं बल्कि पुत्र पिता सम्मान करना भी सीख जाएगा।

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