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ग़ाज़ीपुर: चर्चित ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर के खिलाफ हाइकोर्ट के आदेशानुसार विकास कार्यों की हुई जांच

चर्चित ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर के खिलाफ हाइकोर्ट के आदेशानुसार विकास कार्यों की हुई जांच

राजू पांडेय ( ग़ाज़ीपुर) : जनपद के बाराचवर ब्लॉक अंतर्गत ग्रामसभा टोडरपुर में ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर के द्वारा कराए गए विकास कार्यों की जांच ग़ाज़ीपुर पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी नरेन्द्र विश्वकर्मा द्वारा की गई। बात दें कि यह जांच ग्रामसभा के ही रजनीश मिश्रा के हाइकोर्ट में लगातार रिट दाखिल करने के बाद हुई है। हाइकोर्ट ने जांच के आदेश जुलाई 2020 में ही दिए थे लेकिन जांच को रोकने का प्रयास करते हुए ग्राम सचिव द्वारा अभिलेखों को जांच अधिकारियों को नहीं सौंपा जा रहा था।

जिसके बाद कई बार शिकायत करने के बाद यह जांच कुछ ही बिंदुओं पर की गई है। जिसमे कुछ खड़ंजे और रिबोर, सोपर लाइट की जांच शामिल थी। यह भी बता दें कि इस जांच में के ऐसे कार्य मील जिसको ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर ने माना कि उसने कार्य नहीं कराया है। ऐसे में सवाल तो उठता ही है कि फिर वहां का पैसा कहाँ गया?

आधे-अधूरे अभिलेख थे तैयार

जांच के दौरान हमारी टीम ने देखा कि कई मौकों पर अभिलेखों में छेड़छाड़ किया गया। मसलन व्हाइटनर का प्रयोग कर नाम में बदलाव करना, जगह का नाम बदलना दिखा। इसके अलावा सोलर लाइट में एक जगह ऐसा भी मिला जहां सोलर लाइट के बदले सिर्फ सोलर लाइट लगाने वाला पाइप ही मिला। एमबी मिलान के बाद सपक्षत हो जाएगा पूरा मामला जांच अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि हम जांच के बाद एमबी का मिलान करेंगे और फिर किसी निर्णय पर पहुचेंगे।

जांच से संतुष्ट नहीं शिकायतकर्ता

शिकायतकर्ता रंजीत मिश्रा से जब मीडिया ने बात की तो उन्हीने कहा कि वह इस जांच से असंतुष्ट हैं। वह इस मामले को लेकर फिर से हाईकोर्ट का रुख करेंगे। ग्रामप्रधान भागने लगा मीडिया से जब मीडिया ने ग्रामप्रधान मुन्ना राजभर से बात करनी चाही तो वह भागने लगा। ग्राम प्रधान ने मीडिया के सवालों का कोई जबाब नहीं दिया।

उसने बस इतना ही कहा कि उसने पूरा कार्य कराया है बल्कि आये धन से अधिक का विकास कराया है। बता दें कि यह वही ग्राम प्रधान मुन्ना राजभर है जिसका आवास के नाम पर गांव की ही एक महिला से घुस मांगने का वीडियो वायरल होने लगा था जिसकी सबसे पहले खबर द सर्जिकल न्यूज़ ने ही लगाई थी। जिसके बाद प्रभारी मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल को भी ग्रामसभा में जाकर कार्यवाही का आश्वासन देना पड़ा था।

उक्त जांच में जांच अधिकारी के साथ तकनीकी सहायक त्रिभुवन शर्मा, ग्राम सचिव मुकेश सिंह, शिकायतकर्ता रंजीत मिश्र के साथ सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। इसके अलावा बरेसर पुलिस भी मौके पर पहुंची थी।

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