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Ghazipur news : बाराचवर के सामुदायिक शौचालय का ये हाल तो औरों का क्या होगा

Ghazipur news : What will happen to others in this condition of community toilet of Barachwar

Ghazipur news बाराचवर (गाजीपुर) । लाखों-करोड़ो रुपये खर्च कर गांवों को खुले में शौच मुक्त करने का अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। हालत यह है कि किसी शौचालय में दरवाजा है तो छत नहीं। कहीं दरवाजा और छत है तो सीट नहीं। और तो और सामुदायिक शौचलयों का का तो हाल और भी बुरा है। इनमें न तो दरवाजे लगें और ना ही पानी और प्रकाश की व्यवस्था। आलम यह है कि चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है। जबिक गांव में सफाई कर्मियों व्यवस्था भी है। इसकी ताजा मिशाल गाजीपुर Ghazipur news जनपद के ब्लाक मुख्यालय के गांव बाराचवर में बने सामुदायिक शौचाय को देख कर लगाया जा सकता है।

इस खबर में उपर दिख रही यह तस्वीर बारचवर गांव के सामुदायिक शौचालय की है, जिसमें कुल तीन तरफ से तीन शौचालय बनाए गए हैं। लेकिन इन तीनों शौचालयों में दरवाजा एक में भी नहीं लगा है। यदि लगा भी है तो वह तोड़ दिया गया है। इस सामुदायिक शौचालय में पानी की भी व्यवस्था नहीं है। हर तरफ गंदगी का आलम है।

सामुदायिक शौचालय में रखे हुए हैं उपले

महात्मा गांधी ने जिस स्वच्छ भारत का सपना देखा था उसे साकार करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी के प्रयासों का किस तरह से पलीता लगाया जा रहा है। यह बाराचवर में बने सामुदायिक शौचालय की दुर्दशा देख कर लगाया जा सकता है। जिस शौचालय का उपयोग खुले में सौच को रोकने के लिए होने हाचाहिए उस शौचालय में गोबर के उपले रखे हैं। और इसके आसपार गोबार पाथा जा रहा है।
उपयोग करने लाय नहीं था शौचालय तो हमने रखवा दिया उपला

झारखंड पुलिस से रिटायर्ड एएसआई वकील अंसारी कहते हैं कि इस सामुदायिक शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा था। इसके दरवारे टूटे हुए हैं और कहीं से कोई प्रबंध नहीं था। सो हमने ही अपनी पत्नी से कह कर इसमें उपले रखवा दिए हैं। अगर लोग इस इसका इस्तेमाल करने लगें तो मैं आज ही अभी सभी उपले उठवा दूंगा। वकील अंसारी कहते हैं कि हमने खुद के पैसे खर्च करके इसके चारोंओर साफ सफाई करवाई। नीम का पेड़ भी लगवा।

source (the jharokha)

सरकारी पैसों की बंदरबांट हुई है और कुछ नहीं

वकील अंसारी के अनुसार खुले में शौच मुक्त के नाम पर बाराचवर में सरकारी पैसों की बंदरबांट हुई है। ब्लाक के अन्य ग्राम पंचायतों का तो हम नहीं जानते, लेकिन बाराचवर का हाल तो आप देख ही रहे हैं। इस निर्माण ही आधा अधूरा हुआ है। वकील कहते हैं कि इस सामुदायिक शौचाल में न तो पानी की व्यवस्था की गई और ना ही ढंग की सीट लगी है और ना ही दरवाजे। अगर किसी के घर की बहु-बेटियां शौच करने आएं भी तो कैसे। आप ही बताएं।

वकील कहते हैं कि इस शौचालय का निर्माण योगेंद्र प्रधान (प्रधान उनकी पत्नी थीं) के कार्यकाल में हुआ था। सामुदायिक शौचाल के निर्माण में लाखों रुपये खर्च किए गए। और हालत देख ही रहे है। ऐसे न जाने कितने और शौचालय होंगे जिनके नाम पर पैसे उतारे और खपाए गए होंगे। इसकी जांच होनी चाहिए। गांवों में स्वच्छता अभियान के नाम पर लाखों रुपये के गड़बड़झाले की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।

वर्ष 2015-16 में लागू की गई थी स्वच्छ भारत मिशन योजना

बतादें कि वर्ष 2015-16 स्वच्छ भारत मिशन लागू किया गया था। इसी योजना के तहत बाराचवर ब्लाक के सभी 83 राजस्व ग्राम एवं ग्राम पंचायतों में शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। हालांकि वर्ष 2016 में इस योजना का नाम स्वच्छता अभियान कर दिया गया, लेकिन पंचायत राज विभाग जमीनी स्तर पर कार्य छोड़ शुरू से ही मात्र कागजों में कोरम पूरा करने में लगा रहा। इसी कागजी कोरम के आधार पर बाराचवर ब्लाक के सभी ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया। जबकि सच्चा इस तस्वीर में झलकती है।

ग्रामीणों का दर्द

बारचवर पूरब टोल के लोगों का कहना है कि बाराचवर में दो सामुदायिक शौचलयों का निर्माण किया गया। एक गांव के पश्चिम तरफ और दूसरा पूरब की तरफ। पश्चिम का तो ठीक है। पर पूरब वाले का हाल आप देख ही रहे है। इस सामुदायिक शौचालय में न तो दरवाजा है और ना ही पानी की व्यवस्था। सफाई कर्मी भी नहीं हैं। वैसे बाराचवर गांव में सरकारी सफाइकर्मी नियुक्त हैं पर दिखाई एक भी नहीं देते।

कारण कुछ शौचालय का दरवाजा ही नही हैं और कुछ की आज तक छत ही गायब है तो किसी में सीट ही नहीं लगी। किसी के गड्ढे भी न के बराबर है। शौचालय में उपला और सरपत आदि रखा गया है। ऐसे में कैसे को इन शौचालयों का उपयोग कर पाएगा। केवज कागजों में ही बाराचवर गांव को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है।







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