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सावन में काशी का कंकर-कंकर शंकर लागे है

सावन में काशी का कंकर-कंकर शंकर लागे है

काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी। स्रोत : सोशल मीडिया

झरोखा न्यूज डेस्क। काशी बाबा विश्वनाथ की बसाई नगरी है, लेकिन सावन मास में इसकी महत्वा और बढ़ जाती है। तभी तो लोग कहते हैं सावन में काशी का कंकर-कंकर शंकर लागे है। वैसे तो काशी यानी वाराणसी में साल के 12हो माह शिव भक्तों और का तांता लगा रहता है। चाहे वह देसी हो या विदेशी। बाबा भोले नाथ हर किसी की अभिलाषा पूर्ण करते हैं।

सावन मास में बाबा भोले नाथ के दर्शनों का विशेष महत्व है। गंगा स्थान के बाद अल सुबह जब शिव भक्तों का कारवां बाबा के दर्शनों के लिए उमड़ता है तो लंबी कतारें लग जाती है। यहां घंटों इंतजार के बाद गंगाजल, फूल और धूप-दीप लिए मुरदों का दामन फैलाए जब भक्त एक-एक पग आगे बढ़ते हैं तो आस्था सजीव हो उठती ही। मन को अहलादित करने वाला यह मनोरम दृश्य अकेले बाबा विश्वना के आंगन में ही नहीं, बल्कि समूची काशी में हर उस गली, मोहल्ले में दिखाई देखा है जहां भगवान भोलेनाथ का मंदिर है। यहां तक की श्मशान में भक्त भोलेनाथ को ढ़ूढते हुए पहुंच जाते हैं और वहां भी हर-हर महादेव के जयकारे लगने लगते हैं।

काशी के बाहर भी शिव ही शिव

अगर आप किस कारण वश बाबा विश्वनाथ के दर्शनों से चूक जाते हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आप सारनाथ में भी सारंगनाथ महादेव के दर्शन कर उतना ही पुण्य अर्जित कर सकते हैं, जितना की काशी में । मान्यता है किया यहा प्रतिष्ठापित दो शिवलिंगों में से एक भगवान भोलेनाथ का और दूसरा सारंगनाथ का है। इसके बारे में कहा है सारंग नाथ भगवान शिव के साले और मां पार्वती के भाई हैं। सावन में यहां पूरे एक माह तक मेला लगता है और भक्तों का तांता लगा रहता है।

मार्कंडेय महादेव कैंथी

गंगा और गोमती के संगम पर मार्कंडेय महादेव का मंदिर है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव की कृपा से मार्कंडेय ऋषि ने मृत्यु पर विजय प्राप्त किया था और यमराज को उल्टे पांव लौटना पड़ा था। वैसे तो यहां वर्ष भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सावन में यह स्थान और खास हो जाता है। गंगा और गोमती में स्नाकर कर भक्त भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर अपने को धन्य करते हैं।

महाहर में भी महादेव, गूंजता है बमबम भोले

अब काशी क्षेत्र से थोड़ा आगे बढ़ते हैं और पहुंचते हैं लहुरी काशी यानी गाजीपुर जनपद में। यहां मार्कंडेय महादेव की तरह ही महाहार महादेव की भी महिमा अपरंपार है। मान्यता है कि महाहार में ही महाराजा दशरथ ने अंजाने में श्रवण कुमार की हत्या कर दी थी। ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त होने के लिए उन्होंने यहां पर चार मुख वाले भगवान शिव की प्रतिष्ठापना की थी। इसके साथ ब्रह्मा की भी प्रतिमा स्थापित की। महाहर महादेव में भी सावन के महीने में शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां भी पूजा अर्चना करने से उतना ही पुण्य मिलता है, जिता की काशी में बाबा विश्वनाथ की।

कारों में कामेश्वर नाथ

अगर आप यहां भी नहीं आ सकते तो कामेश्वरनाथ महादेव का कारों में दर्शन कर सकते हैं। यहां भी पूरे सावन में भक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव ने कामदेव को भष्म किया था। वैसे यहां भी वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है।







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